Maharashtra की राजनीति में नवाब मलिक को लेकर फडणवीस ने जड़ा चौका
महाराष्ट्र में करोड़ों रुपये के सिंचाई घोटाले के आरोप लगने के बाद भी भले ही भाजपा ने राकांपा नेता अजित पवार से हाथ मिला लिया हो, लेकिन पार्टी ने मौजूदा विधायक नवाब मलिक को राकांपा में शामिल करने के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा के कड़े रुख के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। मलिक के खिलाफ आरोप अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ उसके कथित संबंधों से संबंधित हैं, जो 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोटों में शामिल था। सत्तारूढ़ गठबंधन के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि अजित और कैबिनेट मंत्री संजय राठौड़, जो 2021 में पुणे में एक टिकटॉक कलाकार की आत्महत्या पर विवाद के केंद्र में थे, दोनों को दोषमुक्त कर दिया गया, जबकि मलिक के खिलाफ आरोप राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों तक फैले हुए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इसी कारण से मलिक को शामिल नहीं करना चाहती है और जानती है कि इससे संभवत: आरएसएस भी नाराज हो जाएगा। गुरुवार को, जब मलिक शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए नागपुर में विधानसभा पहुंचे और सत्ता पक्ष में बैठे, तो अजित के साथी डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें कड़े शब्दों में एक पत्र लिखकर मोर्चा संभाला। फडणवीस ने अजित पवार को लिखे अपने पत्र में कहा कि मलिक को एक विधायक के रूप में विधानसभा की कार्रवाई में भाग लेने का अधिकार है। उन्होंने कहा ,‘‘ हमारी (भाजपा) उनके खिलाफ कोई व्यक्तिगत दुश्मनी या द्वेष नहीं है। लेकिन जिस प्रकार के आरोपों का वह सामना कर रहे हैं, उसे देखते हुए हमारा मानना है कि उन्हें महायुती में शामिल करना उचित नहीं होगा।’’ भाजपा नेता ने साफ तौर पर कहा कि सत्ता आती है और जाती है। लेकिन सत्ता से ज्यादा महत्वपूर्ण देश है। फिलहाल वह सिर्फ मेडिकल आधार पर जमानत पर बाहर हैं। अगर उन पर लगे आरोप साबित नहीं हुए तो हमें उनका स्वागत करना चाहिए। भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों से जुड़े धनशोधन के मामले में ईडी ने मलिक को फरवरी 2022 में गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह चिकित्सकीय आधार पर जमानत पर हैं।गिरफ्तारी के समय मलिक उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। विपक्ष ने तुरंत विवाद को तूल दे दिया, विपक्ष के नेता कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार ने कहा, “भाजपा के दोहरे मानदंड उजागर हो गए हैं। एनसीपी को मलिक से कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन जब विपक्ष ने मुद्दा उठाया तो बीजेपी ने मलिक से दूरी बना ली।’ शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वे खुद को मलिक से दूर कर रहे हैं। लेकिन आश्चर्य है कि उन्हें एनसीपी (अजित पवार के नेतृत्व वाले) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के बारे में क्या कहना है, जो मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं।